धर्म/अध्यात्म

यदि आध्यात्म भीतरी साधन है, तो धर्म बाहरी साधन है। आध्यात्म और धर्म एक ही साईकल के दो पहिये की तरह हैं, यदि एक भी खराब होगा तो दूसरे पर प्रभाव पड़े बिना नहीं रह सकता। धर्म और आध्यात्म दोनो ही मनुष्य जीवन के जरूरी भाग है जिनके बिना मनुष्य अपने चरम लक्ष्य को प्राप्त नही कर सकता।

संयम से पायें क्रोध पर विजय – स्वामी सत्यप्रकाश

क्रोध क्यों आता हैं? जब हमारे मन के, इच्छा के विपरीत कोई कार्य होता हैं तो क्रोध आ जाता हैं।

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हम शांतिमय जीवन कैसे जियें –स्वामी सत्यप्रकाश 

हर कोई मनुष्य सुकून, शांति की जिंदगी जीना चाहता हैं, वो तमाम कोशिश जरूर करेगा की उसे शांति व आनंद

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